
वतन बिक जाय
चमन बिक जाय...
आओ इससे पहले ही-
एक बारुदी सुरंग बिछाकर
नीलामी रोक दी जाय !
बिक रहा बापू का घर
3 months ago
THE MUIR SPIRIT
Posted by मिथिलेश श्रीवास्तव at 10:32 PM 3 comments Links to this post
Labels: MUIRIAN अंक 1 अक्टूबर 2004